Disclaimer: The Information on this website has not been evaluated by the Food and Drug Administration. Authors of this website are neither licensed physicians nor scientists. Information provided on this site are not intended to diagnose, treat, cure or prevent any disease. If you have a medical condition, consult your physician. All information is provided for educational purposes only. Although information presented by the website is based on Ayurvedic principles practiced for thousands of years, it should not be taken or construed as standard Type your question here and then click Search medical diagnosis or treatment. For any medical condition, always consult with a qualified physician. This website neither claim cure from any disease by any means NOR it sell any product directly. All products and Advertising Links are External





Health Benefit - नीबू (Lemon)

Health Benefit - नीबू (Lemon)

नीबू (Citrus lemon) छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं।
यह विटामिन सी से भरपूर नीबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है। इसका रस्वाद खट्टा होता है। इसके रस में ५% साइट्रिक अम्ल होता है तथा जिसका pH २ से ३ तक होता है।

नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है- विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। इसमें -पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। रक्ताल्पता से पीडि़त मरीजों को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। यही नहीं, नीबू का सेवन करने वाले लोग जुकाम से भी दूर रहते हैं। एक नीबू दिन भर की विटामिन सी की जरूरत पूरी कर देता है। नीबू के कुछ घरेलू प्रयोगों पर लगभग हर भारतीय का विश्वास हैं। ऐसा माना जाता है कि दिन भर तरोताजा रहने और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू का रस व एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए। एक बाल्टी पानी में एक नीबू के रस को मिलाकर गर्मियों में नहाने से दिनभर ताजगी बनी रहती है। गर्मी के मौसम में हैजे से बचने के लिए नीबू को प्याज व पुदीने के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। लू से बचाव के लिए नीबू को काले नमक वाले पानी में मिलाकर पीने से दोपहर में बाहर रहने पर भी लू नहीं लगती। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, सेलेनियम और जिंक भी होता है। गले में मछलीका कांटा फंस जाए तो नीबू के रस को पीने से निकल जाता है।




  1. नींबू का सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है ।
  2. नींबू में हींग को  मिलाकर चूसने से मिर्गी में लाभ होता है।
  3. नींबू में काला नमक लगाकर चूसने से बदहज़मी ठीक होती है।
  4. नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है। 
  5.  नींबू एक एंटीऑक्सिडेंट है जो कि कई खतरनाक बीमारियों जैसे कि स्ट्रोक, हृदय रोग और कैंसर को रोकने में मदद करता है।  
  6.  नींबू का सेवन रक्तचाप को कम करता है और एचडीएल (अच्छे कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाता है। 
  7.  नींबू में  कैंसर विरोधी तत्व पाए जाते हैं जो  प्रोस्टेट और स्तन कैंसर की दर को कम करते हैं। 
  8. नीबू के रस और जैतून के तेल का मिश्रण  पित्ताशय की पथरी निकालने के लिए घरेलू उपचार की तरह प्रयोग किया जाता रहा है, लेकिन इसे गुर्दे की पथरी निकालने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। नीबू में उपस्थित सिट्रिक एसिड कैल्शियम निर्मित गुर्दे की पथरी को विखंडित करने में मदद करता है और इनका आगे बनना भी रोकता है।
  9.  नींबू का रस त्वचा को चमक देने में सहायक होता है। 
  10. गर्म पानी में नींबू का रस के कुछ बूंदों को पाचन तंत्र को साफ करने और यकृत को शुद्ध करने के लिए भी अच्छा माना जाता है। 
  11.  आम सर्दी को रोकने के लिए नींबू का रस दिया जाता है। 
  12.  मूत्र पथ के संक्रमण और गोनोरिया को रोकने या इलाज करने के लिए नींबू का रस दिया जाता है। 
  13.   कुछ कीड़ों के काटने और डंक की जगहों पर नींबू का रस लगाने से  जहर और दर्द को दूर  होता है। 
  14.  नींबू का रस पेट में दर्द और गैस्ट्रिक समस्याओं से मुक्ति देता है। 
  15.  नींबू का रस  ग्लिसरीन के साथ लगाने से सूखी त्वचा में लाभ करता है। 
  16.  गर्म पानी में  नींबू का रस हर सुबह लेने से  कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम होता है और वजन कम होता है। 
  17.  दस्त और निर्जलीकरण (Dehydration)  के मामले में  नींबू का रस सबसे अच्छा पेय है। 
  18. नींबू का रस भी एक माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह  दांतों को सफेद करता है और मसुडो  को मजबूत करता है। 
  19.  नींबू का रस खुजली वाली त्वचा से मुक्ति दिलाता है।  
  20. नींबू का रस पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस को रोकने में मदद करता है।
  21. जिन  को भूख कम लगती है व पेट दर्द की शिकायत रहती है उन्हें नींबू की फांक में काला या सेंधा नमक लगाकर उसको तवे पर गर्म करके चूसने से न दर्द में आराम होता है और भूख भी खुलकर लगती है।
  22. चक्कर या उल्टी आने पर नींबू के टुकडे पर काला नमक, काली मिर्च लगाकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते हैं और उल्टी भी बंद हो जाती है।
  23. एक गिलास पानी में एक नींबू का रस निचोडकर उसमें एक चम्मच चीनी मिलाकर पीने से हैज़ा रोग भी ठीक हो जाता है।
  24. नींबू के पत्तों के रस और शहद की बरीबर मात्रा मिलाकर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मर जाते हैं। नींबू के बीजों के चूर्ण की फंकी लेने से पेट के कीड़े नहीं रहते।
  25. नींबू के पत्तों के रस को नाक से सूंघने से हमेशा सिरदर्द रहने की शिकायद से आराम मिलता है।
  26. नींबू का रस निकालकर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून गिरने (नकसीर) की समस्या बंद हो जाती है।
  27. नींबू का रस व शहद मिलाकर मसूड़ों पर मलते रहने से उनसे रक्त आना बंद हो जाता है और पीपपन भी दूर होता है।
  28. नींबू में फिटकरी का चूर्ण भरकर खुजली वाली जहग पर धीरे से रगड़ने पर खुजली बंद हो जाती है।
  29. यदि गर्भधारण के चौथे महिने से प्रसवकाल तक महिला रोज़ एक नींबू की शिकंजी पीए तो प्रसव में कष्ट कम होता है।

सौंदर्य में नीबू का उपयोग 

  1. नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर रात में सिर में हल्के हाथ से रोजाना मालिश करने और सुबह सिर धोने से बालों की रुसी ( खुश्की )की समस्या दूर होती है।
  2. सिर धोने के पानी में दो नींबू निचोडकर एक सप्ताह तक लगातार प्रयोग करने से बाल मुलायम बनते हैं और उनका झडना कम होता है। साथ ही बालों की खुश्की या रूसी भी कम होती है।
  3. नारियल के तेल में नींबू का रस और कपूर लगाकर सिर की मालिश करने से बालों के समस्याएं कम होती हैं।
  4. सुबह नहाने से पहले नींबू के छिलकों को चेहरे पर धीरे-धीरे मलकर चेहरा पानी से धोने से चेहरे का रंग साफ होता है। यह बाजार में मिलने वाले किसी भी ब्लीचिंग क्रीम या ब्यूटी ब्लीच से बेहतर काम करता है। 
  5. नींबू का रस और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा बेदाग और इसकी त्वचा कोमल व स्वच्छ होती है।
  6. नीबू के रस में  विटामिन सी आँखों के नीचे के काले घेरे हटाने में भी सहायक होता है। रुई की सहायता से अपनी आँखों के चारों तरफ नीबू का ताजा रस लगाएँ। 10 मिनट लगा रहने दें और फिर धो डालें। कुछ सप्ताहों तक दिन में एक बार लगाएँ।
  7. नींबू का रस के उपयोग से रूसी और चिकने  बालो  के लिए फायदामंद  है। 
  8.  नींबू का रस चेहरे पर लगाने से  चेहरे के झुर्रियों को दूर करता है .
  9.  नींबू का रस लगाने से मुँहासे  सूख जाते  है । 

नीबू के सेवन से नुकसान 

  1. पेट की ख़राबी -  यदि आप एक दिन में ज्यादा मात्रा में  नींबू का रस लेते हैं, तो पेट खराब होंने  की  संभावना होती  है   क्योकि नीबू की वजह  पेट अम्लीय हो जाता है  |
  2. पेप्टिक अल्सर - नीबू के ज्यादा सेवन से पेट में एसिड का उत्पादन ज्यादा होने  से  पेप्टिक अलसर होने के सम्भावना होती है .
  3. पत्थरी का बनाना - नींबू के रस के साथ,  नींबू के पेल्स का भी उपयोग किया जाता है।  इन पेल्स में भारी मात्रा में ऑक्सलेट्स होते हैं ऑक्सीलेट शरीर के भीतर क्रिस्टल बनाते हैं और कैल्शियम अवशोषण को बड़ी मात्रा में रोक देते हैं | जिसके कारण पत्थरों के रूप में कैल्शियम हमारे गुर्दे और पित्ताशय को ठोस बना देता है |
  4. बार-बार पेशाब आना -  नींबू की अम्लीय प्रकृति विटामिन सी को काफी मात्रा में रखता है | हालांकि यह विटामिन हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है, यह मूत्र को बढाता है और आपको बार-बार पेशाब करने जाना पड़ सकता है |
  5. सर दर्द और माइग्रेन - | इसमें काफी मात्रा में एमिनो एसिड पाया जाता है जिसे टाइरामाइन कहा जाता है, जिससे हमारे मस्तिष्क में खून का प्रवाह बढ़ जाता है, अचानक यह तीव्र माइग्रेन या सिरदर्द की समस्या को बढ़ा देता है |
  6. सनबर्न - सौदर्य के लिए हम नीबू का कई तरीको से इस्तेमाल करते हैं | लेकिन अगर इसका उपयोग अधिक किया जाए तो आपकी स्किन जल सकती है जिसे सनबर्न कहा जाता है | 
  7. दांतों के लिए हानिकारक – नीबू का रस ज्यादा पीते हैं तो ये आपके दांत के लिए हानिकारण साबित हो सकता है | यह  दांतों को पीला बना देता है और आपका दांत बहुत अधिक अम्लीय हो जाता है, साथ ही आपके दांत में दर्द होने लगता है |
Lemon is one of those super foods with a myriad health and cosmetic benefits. There are a few persons for whom it is an allergen, so make sure you are not allergic to this natural product, before you start enjoying the many benefits.

Health Benefit - आंवला

Health Benefit - आंवला 



परिचय -  आंवला एक कसैला स्वाद वाला अत्यन्त गुणकारी पोशक, शीतल, विटामिन सी से भरपूर वृद्धावस्था को रोकने में समर्थ धातृ फल है। यह  विटामिन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। आँवले के 100 ग्राम रस में 921 मि.ग्रा. और गूदे में 720 मि.ग्रा. विटामिन सी पाया जाता है। आर्द्रता 81.2, प्रोटीन 0.5, वसा 0.1, खनिज द्रव्य 0.7, कार्बोहाइड्रेट्स 14.1, कैल्शियम 0.05, फॉस्फोरस 0.02, प्रतिशत, लौह 1.2 मि.ग्रा., निकोटिनिक एसिड 0.2 मि.ग्रा. पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा (ग्लूकोज), अलब्यूमिन, काष्ठौज आदि तत्व भी पाए जाते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) के कारण, लक्षण और उपाय

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) के कारण और उपाय 
  

ब्लड प्रेशर - हमारी रक्त वाहिनियों (धमनियों तथा शिराओं) पर पड़नेवाले खून के दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं.
नार्मल ब्लड प्रेशर (Normal Blood pressure) 120/80 माना जाता है. इसमें पहली संख्या को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है क्योंकि यह हृदय के धड़कने (सिस्टोल) के समय के ब्लड प्रेशर को दिखाता है. दूसरी संख्या को डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं क्योंकि हृदय के तनाव-मुक्त रहने के समय के ब्लड प्रेशर की सूचना देता है. ब्लड प्रेशर को पारे के स्तंभ में मिलीमीटर में मापा जाता है.

15 बातें – जिन्हें जानने के बाद आप रोज खाएंगे अमरूद


1. अमरूद में मौजूद विटामिन और खनिज शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं. साथ ही ये इम्‍यून सिस्‍टम को भी मजबूत बनाता है. अमरूद खाने की सलाह डॉक्‍टर भी देते हैं. अमरूद खाने के और क्‍या हैं फायदे, इसके बारे में बता रही हैं न्यूट्रीशन सलाहकार देबजानी बनर्जी…

2 . हाई एनर्जी फ्रूटअमरूद हाई एनर्जी फ्रूट है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्‍स पाए जाते हैं. ये तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं.

3 . डीएनए को सुधारे अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन बी-9 शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को सुधारने का काम करता है.

4. दिल का साथी अमरूद में मौजूद पोटैशियम और मैग्‍नीशियम दिल और मांसपेशियों को दुरुस्‍त रखकर उन्‍हें कई बीमारियों से बचाता है.

डेंगू के लक्षण और उपचार

 डेंगू, 'मादा एडीज एजिप्टी' मच्छर के काटने से फैलता है । ये मच्छर साफ़ पानी में पनपता है और बहुत अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता । डेंगू वायरस शरीर में पहुँचने के 3-5 दीन बाद अपना असर दिखाता है , लेकिन कभी-कभी अवधि 7-10 दिन की भी होती हैं। हर वर्ष जुलाई से अक्टूबर के मध्य डेंगू का प्रकोप फैलता ।

डेंगू के प्रकार और उनके लक्षण 

  • सर दर्द
  • तीव्र बुखार
  • जोड़ो में दर्द
  • उलटी/दस्त
  • पुरे शरीर में दर्द
  • आँखों में दर्द
  • शरीर के कुछ हिस्सों पर लाल लाल चकते निकल आना
  • कई बार नाक से खून आता है
साधारण डेंगू बुखार  जिसे क्लासिक डेंगू भी कहते हैं -  सामान्यतः 5-7 दीन तक रहता है । इसमें ठंड (ठंड) लगने के बाद तेज बुखार चढ़ना , सर, मांसपेशियों और सर में दर्द होना, जोड़ों, आँखों के पीछे हिस्से में दर्द होना, जो आँखों को दबाने या फिर हिलाने से और बढ़ता है, बहुत अधिक लगना, भूख न लगना , जी मिचलाना , स्वाद खराब होना , गले में हल्का हल्का दर्द होना , शरीर विशेषकर चेहरे, गर्दन और सीने (छाती) पर लाल गुलाबी रंग के धब्बे नज़र आते हैं ।

डेंगू रक्तस्रावी बुखार (DHE) - यदि ऊपर बताये गए साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ साथ रोगी को नाक और मसूड़ों में खून आना, फिर शौच उलटी में खून आना , त्वचा पर नीले काले रंग के चकत्तेपड़ जाना जैसे लक्षण प्रकट हो तो उसे डेंगू रक्तस्रावी बुखार (DHE) हो सकता है । इसका पता लगाने के लिए रक्त की जांच है । 
डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) -  रोगियों में साधारण डेंगू बुखार और डेंगू रक्तस्रावी बुखार के लक्षणों के साथ बेचैनी महसूस होती है , तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा ठंडी हो, मरीज़ बार बार बेहोश हो, पल्स कभी तेज और कभी धीरे चलने लगे और रक्तचाप एकदम कम हो जाए, तो मामला डेंगू शॉक सिंड्रोम का है । डेंगू की ये अवस्था बेहद खतरनाक होती है , जिसमें मरीज़ को अस्पताल में भर्ती कराना ज़रूरी हो जाता है ।

डेंगू का इलाज 

साधारण डेंगू बुखार में पेरासिटामोल से काम चल सकता है।लेकिन ध्यान रखें मरीज़ को एस्पिरिन (disprin आदि) की गोलियाँ बिखुल नहीं देनी चाहिए , क्योंकि इससे प्लेटलेट्स काम होने का खतरा रहता है ।

आराम  करे और लिक्विड लेते रहो| इस दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाइये, इसलिए डॉक्टर द्वारा बताये पाउडर को पानी में डालकर पीते रहे|

किसी भी अन्य बीमारी की तरह डेंगू के मरीज़ को भी अच्छे डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी होता है। इसीलिए यदि आपको ऊपर दिए कोई लक्षण अपने शरीर में लगे अपने खून की जांच ज़रूर कराएं ।

डेंगू से बचाव के घरेलू उपाय 

विटामिन सी - विटामिन सी की अधिकता वाली चीज़ें जैसे अमला, संतरा फिर मौसमी पर्याप्त मात्र में ले, इससे शरीर का सुरक्षा चक्र (प्रतिरक्षा प्रणाली) मज़बूत होता है।

हल्दी - खाने में हल्दी का अधिक प्रयोग करे। इसे सुबह आधा चम्मच पानी के साथ या फिर रात में दूध से लिया जा सकता है । लेकिन मरीज़ को यदि ज़ुकाम हो तो दूधका प्रयोग न करें ।

तुलसी और शहद - तुलसी और शहद के पाटों को उबाल कर पियें , इससे भी इम्यून सिस्टम बेहतर होता है ।

सरसों का तेल  - नाक के अंदर सरसों का तेल लगाएं । तेल की चिकनाहट बैक्टीरिया को भीतर जाने से रोकती है।

डेंगू को रोकने के उपाय 

मच्‍छरों से बचना - डेंगू का वायरस मच्‍छरों के काटने से फैलता है। डेंगू एक संक्रामक रोग है और कुछ स्थितियों में यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने चाहिए। डेंगू से बचने का एकमात्र उपाय, मच्‍छरों से बचना है। यहां हम आपके और आपके परिवार के लिए इस महामारी को रोकने में मदद करने के कुछ सुझावों के बारे में बता रहे हैं।

रुके हुए पानी से छुटकारा पाएं

एडीज एजिप्‍टी मच्‍छर दिन के समय संक्रमण फैलाते हैं। इनका जन्‍म आमतौर पर जमा पानी वाले स्‍थानों पर होता है। इसलिए घर के अंदर और आस-पास स्थिर पानी को साफ करना बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। इसके अलावा कूलर, गमले आदि में पानी जमा न रहने दें।

रोगी को मच्‍छर के कटाने से बचायें
डेंगू से पीड़ि‍त व्‍यक्ति को फिर से मच्‍छर द्वारा कटाने से बचाये। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित करें किे घर में हर किसी की मच्‍छर के काटने के खिलाफ रक्षा की जाये।

मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का प्रयोग करें
मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्‍तेमाल नियमित रूप से करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि दिन है या रात। मच्‍छरों वाले स्‍थान में मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्तेमाल रात में करने के साथ-साथ दिन में भी करें।

मच्‍छरों के सभी प्रवेश बिंदुओं को ब्लॉक करें
आप इस बात को भी सुनिश्चित करें कि अंदर और बाहर जाने के सभी रास्‍तों में किसी भी प्रकार का छेद न हो। अगर आप ऐसा पाते हैं तो घर में मच्‍छरों के प्रवेश को निषेध करने के लिए ठीक से उन सभी छेदों को ब्‍लॉक कर दें।
मच्छरदानी का प्रयोग करें
घर में मच्‍छरों के अधिक होने पर सोने के लिए आपको हर रात मच्‍छरदानी का इस्‍तेमाल जरूर करना चाहिए। विशेष रूप से अगर आपके घर में बच्‍चे हैं, तो उन्‍हें रात के समय बिना मच्‍छरदानी के न सोने दें।

कूड़ेदान को साफ रखें
कूड़ेदान में कचरा एकत्रित होता दिखाई देने पर उसे तुरंत खाली करें। क्‍योंकि गंदगी या गंदा हिस्‍सा मच्‍छरों के लिए प्रजनन भूमि हो सकता है। इसके अलावा, उस क्षेत्र में मच्‍छरों के प्रवेश को रोकने के लिए कचरे को ढंक कर रखें।

घर के पास तुलसी के पौधे को रखें
प्राकृतिक तरीके से घर में मच्‍छरों के प्रवेश को रोकने के लिए अपनी खिड़की या दरवाजे के पास तुलसी का पौधा लगाये। यह प्राकृतिक तौर पर रिपेलेंट का काम करता है जिससे इस संक्रमण की आशंका घटती है।

डेंगू होने पर क्या खाएं (डेंगू रोगी के लिए खाद्य पदार्थ)
पपीता पत्ते: ये डेंगू के रोगी के लिए महा औषधि का काम करता है । इलाज करने के लिए पपीते के दो पत्ते लें उनको पीसकर रस निकल लें । रस के कड़वेपन को दूर करने के लिए इसमें संतरे का रस (नारंगी) का रस या शहद मिलाइए ।दिन में एक बार इस रस को लें । रास का सेवन करने से रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या बढती है जो डेंगू के वायरस से लड़ता है।

संतरे का रस:  संतरे में विटामिन भरपूर मात्र में होता है जो रोगी की पाचन शक्ति को मज़बूत करता है । संतरा हमारे रक्त की एंटीबॉडी को भी बढाता है जिससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होती है ।

दलिया: डेंगू सीधे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमले करता है जिसके कारण हमारा शरीर कमजोर हो जाता है । इसलिए डेंगू के मरीज़ को दलिया जैसा हल्का भोजन करना चाहिए

हर्बल चाय: अदरक (लहसुन) डालकर हुई हर्बल चाय बुखार को कम करने में मदद करती है और इसके सेवन से रोगी को आराम भी मिलता है।

नारियल का पानी: बुखार के कारण शरीर में जो पानी (जल) की कमी होती है उसको पूरा करने में नारियल का पानी बहुत मदद करता है। साथ ही यह शरीर में खनिजों की कमी को दूर करता है।

शोरबा (सूप): गाजर (गाजर), खीरा (ककड़ी) हां सब्जियों से बने सूप मुझे भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों होते हैं । ये डेंगू से लड़ने में मरीज़ की मदद करते हैं ।

नींबू का रस (नींबू का रस): नींबू का रस डेंगू के रोगी के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि ये रक्त की अशुद्धियों को मूत्र के साथ बाहरनिकाल देता है ।

Source - फेसबुक 

जिद्दी मस्सों से छुटकारा दिलाती है किचन में मौजूद ये 12 चीजें

तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
हरे, हाथ-पैरों और पीठ पर काले और भूरे रंग के छोटे गोल से दिखाई देने वाले मस्से ज्यादातर दर्द तो नहीं करते, लेकिन कहीं न कहीं इनकी वजह से परेशानी जरूर होती है। इसे हटाने के लिए अपनाए जाने वाले उपाय कई बार बड़े घावों का कारण भी बन जाते हैं। वैसे, अगर इनके साथ ज्यादा छेड़छाड़ न की जाए तो ये खुद ही खत्म हो जाते हैं। पेपीलोमा वायरस के कारण मस्से बनते हैं और इनके साथ छेड़छाड़ करने से और भी मस्से हो सकते हैं।
मस्से को दूर करने के घरेलू उपाय
मस्से को बिना किसी ऑपरेशन या सर्जरी के आसानी से कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर ही दूर किया जा सकता है।
बेकिंग सोडा और अरंडी का तेल
किचन में पाए जाने वाले बेकिंग सोडा और अरंडी तेल की बराबर मात्रा मिलाकर पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को रात भर मस्से पर लगा रहने दें। 2-3 दिन तक के लगातार इस्तेमाल के बाद से ही मस्से गायब होने लगते हैं।
प्याज का रस
खाने का जायका बढ़ाने वाला प्याज भी मस्से को दूर करने में कारगर इलाज है। प्याज के रस की थोड़ी-थोड़ी मात्रा दिन में 2 बार मस्से वाला हिस्से पर लगाएं। जल्दी ही असर दिखाई देने लगता है।

लहसुन
लहसुन को छिलकर उसकी कली को हल्के हाथों से मस्से पर रगड़िए। उसके रस में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल तत्व से मस्सा कुछ ही दिनों में सूखकर झड़ जाता है।
अगरबत्ती
ज्यादातर लोग मस्से को दूर करने के लिए इस इलाज को अपनाते हैं। अगरबत्ती के जले हुए हिस्से को मस्से पर लगाएं, ध्यान रहें ज्यादा देर तक न रखें। 5-6 बार ऐसा करने से ही मस्सा आसानी से सूख कर अलग हो जाता है।
पाइनएप्पल जूस
अनानास के रस में ऐसे कई एंजाइम मौजूद होते हैं जो मस्से को दूर करने में कारगर होते हैं।
एप्पल जूस
सेब के रस में भी मस्से को दूर करने का गुण होता है। इसके जूस को तकरीबन 3 हफ्ते तक लगातार मस्से वाली जगह पर लगाएं। इसका असर धीरे-धीरे होता है।
ऐलोवेरा
ताजा ऐलोवेरा जेल से मस्सों पर मसाज करने से भी काफी फायदा मिलता है।
शहद
शहद के उपयोग से भी मस्सों की समस्या को जल्द दूर किया जा सकता है।

केले का छिलका
केले के छिलके को भी मस्से को खत्म करने में इस्तेमाल किया जाता है। छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर बांध लें। रोजाना इसे बदलते रहें, मस्से को दूर करने का अच्छा फॉर्मूला है।
बरगद के पत्ते
बरगद के पत्तों के रस को मस्सों पर लगाने से वो सूखने लगते हैं और धीरे-धीरे सूखकर झड़ जाते हैं।

आलू का रस
आलू ब्यूटी प्रोडक्ट्स के तौर पर काफी समय से उपयोग किया जाता रहा है। आलू को छीलने के बाद उसे काट कर मस्से वाली जगह पर लगाएं। बहुत जल्द असर करता है।
अरंडी का तेल
अरंडी का तेल को मॉइश्चराइजर के तौर पर मस्से वाली जगह लगाएं। रोजाना दिन में दो बार इस्तेमाल के बाद से ही फर्क नजर आने लगता है।
SOURCE - BHASKER

M1