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May 20, 2026

घरवैदिक भाग 1: 2. घरवैदिक जीवनशैली — संतुलित दिनचर्या, भोजन और प्राकृतिक स्वास्थ्य का मार्ग

यह लेख “घरवैदिक भाग 1” पुस्तक श्रृंखला से लिया गया है।
इस श्रृंखला का उद्देश्य आयुर्वेद, घरेलू स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली की सरल एवं व्यावहारिक जानकारी देना है। 📘 Paperback संस्करण - https://bit.ly/gharvedic_part1और 
📱 eBook - https://www.informationcenter.co.in/play.google.com/store/books/details?id=YEHWEQAAQBAJ  संस्करण उपलब्ध हैं।

2. घरवैदिक जीवनशैली

हमारे घरों में स्वास्थ्य की देखभाल केवल दवाइयों या चिकित्सकीय उपचार तक सीमित नहीं रही है। यह रसोई, दिनचर्या, मौसम और व्यवहार के छोटे-छोटे नियमों में स्वाभाविक रूप से समाई रही है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की आदतों में एक ऐसा संतुलन छिपा होता है, जो शरीर को सहज रूप से स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करता है।

इसी संतुलित, सरल और व्यवहारिक जीवन-पद्धति को “घरवैदिक जीवनशैली” कहा जा सकता है। यह कोई नई या कृत्रिम प्रणाली नहीं, बल्कि वही पारंपरिक समझ है जिसे व्यवस्थित और सजग रूप में अपनाया जाए।

घरवैदिक भाग 1: 1. आयुर्वेद क्या है? — मूल सिद्धांत, इतिहास और जीवनशैली का परिचय

यह लेख “घरवैदिक भाग 1” पुस्तक श्रृंखला से लिया गया है।
इस श्रृंखला का उद्देश्य आयुर्वेद, घरेलू स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली की सरल एवं व्यावहारिक जानकारी देना है। 📘 Paperback संस्करण - https://bit.ly/gharvedic_part1और 
📱 eBook - https://www.informationcenter.co.in/play.google.com/store/books/details?id=YEHWEQAAQBAJ  संस्करण उपलब्ध हैं।


घर-परिवार में जब भी स्वास्थ्य की बात होती है
, तो हमारा ध्यान स्वाभाविक रूप से दवाइयों, जांचों और चिकित्सकों की ओर जाता है—और यह आवश्यक भी है। आधुनिक चिकित्सा ने अनेक जटिल रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

किन्तु इसके साथ-साथ हमारे जीवन में एक ऐसी परंपरा भी रही है, जो स्वास्थ्य को केवल रोग के संदर्भ में नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन के संतुलन के रूप में देखती है। यह परंपरा शांत, गहरी और अनुभव-आधारित है—इसी का नाम है आयुर्वेद

आयुर्वेद” शब्द ‘आयु’ (जीवन) और ‘वेद’ (ज्ञान) से मिलकर बना है। अर्थात यह जीवन को समझने और उसे संतुलित बनाए रखने का विज्ञान है। आयुर्वेद केवल रोग होने पर उपचार की बात नहीं करता, बल्कि यह सिखाता है कि हम ऐसा जीवन कैसे जिएँ जिससे रोग उत्पन्न ही न हों, और यदि हों भी तो शरीर उन्हें स्वाभाविक रूप से संभाल सके।

Apr 18, 2026

Health: Diabetes – A Complete Guide -1: डायबिटीज़ क्या है?

Health News Center: Diabetes – A Complete Guide -1: डायबिटीज़ क्या है?:    यह अध्याय “डायबिटीज – एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Diabetes – A Complete Guide”) पुस्तक पर आधारित है।

👉 पूरी  पुस्तक यहाँ से खरीदे: 

1: डायबिटीज़ क्या है?

 डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus) आधुनिक युग की सबसे गंभीर और व्यापक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह एक दीर्घकालिक (Chronic) मेटाबॉलिक विकार (Metabolic Disorder) हैजिसमें शरीर में रक्त शर्करा (Blood Glucose) का स्तर सामान्य से अधिक बना रहता है। सामान्य परिस्थितियों में भोजन से प्राप्त कार्बोहाइड्रेट टूटकर ग्लूकोज़ में बदल जाते हैंजो शरीर की कोशिकाओं के लिए मुख्य ऊर्जा स्रोत होता है। इस ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुँचाने का कार्य इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन करता हैजिसका निर्माण अग्न्याशय (Pancreas) में होता है।

जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाताया बना हुआ इंसुलिन प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर पातातब ग्लूकोज़ कोशिकाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप यह रक्त में जमा होने लगता है और धीरे-धीरे पूरे शरीर की जैविक प्रणालियों (Body Systems) को प्रभावित करता है। यही स्थिति डायबिटीज़ कहलाती है।

Jan 26, 2026

फिटकरी के फायदे, उपयोग और नुकसान



फिटकरी एक रंगहीन रसायनिक पदार्थ है, जो एक किस्टल की तरह होती है। इसका रासायनिक नाम पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट है। इसे अंग्रेजी में एलम कहा जाता है। सामान्य से दिखने वाले इस पदार्थ का महत्व चिकित्सा के क्षेत्र में अहम है। आगे हम बता रहे हैं कि फिटकरी के कौन-कौन से प्रकार उपलब्ध हैं।
फिटकरी के प्रकार – 
फिटकरी का सही चुनाव करना आपके लिए बड़ा सवाल हो सकता है। सही चुनाव करने के लिए आपको इसके विभिन्न रूपों के बारे में पता होना चाहिए। आइए, नीचे जानते हैं फिटकरी के विभिन्न प्रकारों के बारे में।
पोटैशियम एलम : पोटैशियम एलम को पोटाश एलम और पोटैशियम एलम सल्फेट के नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। माना जाता है कि 1500 ईसा पूर्व के आसपास फिटकरी के इस रूप का इस्तेमाल पानी की गंदगी को साफ करने के लिए किया गया था।
अमोनियम एलम : अमोनियम एलम एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है। फिटकरी के इस प्रकार का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल संबंधी उत्पादों में किया जाता है, जैसे आफ्टरशेव लोशन और हाथों से जुड़े उत्पाद।


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क्रोम एलम : क्रोम एलम भी फिटकरी का एक प्रकार है, जिसे क्रोमियम पोटैशियम सल्फेट के नाम से भी जाना जाता है। यह क्रोमियम (एक रासायनिक तत्व) का पोटैशियम डबल सल्फेट है, जिसका इस्तेमाल चमड़ा बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है।
एल्‍यूमीनियम सल्‍फेट : इस कम्पाउन्ड को पेपरमेकर की फिटकरी के रूप में भी जाना जाता है। वैसे, तकनीकी रूप से यह फिटकिरी नहीं है।


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सोडियम एलम : यह एक अकार्बनिक (Inorganic) कंपाउंड है, जिसे सोडा एलम के नाम से भी जाना जाता है। इस सफेद ठोस का उपयोग बेकिंग पाउडर के निर्माण और फूड एडिटिव के रूप में किया जाता है।
सेलेनेट एलम : फिटकरी का वो प्रकार, जिसमें सल्फर की जगह सेलेनियम मौजूद होता है।
फिटकरी के फायदे – 

1. दंत स्वास्थ्य
फिटकरी के फायदे दांतों के लिए बहुत हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर फिटकरी से मुंह की सफाई की जाए, तो दांत की कैविटी और दांतों के टूटने की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसके लिए आप फिटकरी को माउथवॉश के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं ।


2. शरीर की दुर्गंध 
अगर आप शरीर की दुर्गंध से परेशान हैं, तो आप फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पैरों की बदबू दूर करने के लिए फिटकरी का प्रयोग किया जा सकता है (2)। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, त्वचा की दुर्गंध हटाने के लिए फिटकरी का इस्तेमाल आफ्टरशेव, डिओडरेंट और बॉडी लोशन में भी किया जाता है ।


3. माउथवॉश
फिटकरी एक कारगर माउथवॉश भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार फिटकरी युक्त माउथवॉश का दैनिक उपयोग करने से प्लाक से छुटकारा पाया जा सकता है। खासकर, बच्चों के ओरल हेल्थ में फिटकरी अहम भूमिका निभा सकती है ।


4. मांसपेशियों की ऐंठन 
फिटकरी के फायदे यहीं खत्म नहीं होते हैं। आप इसका इस्तेमाल मांसपेशियों की ऐंठन से राहत पाने के लिए भी कर सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, पोटैशियम एलम (फिटकरी) से मांसपेशियों में संकुचन (contraction) को दूर किया जा सकता है ।
बुखार और खांसी जैसी शारीरिक समस्याओं के लिए भी फिटकरी के बहुत फायदे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, फिटकरी के इस्तेमाल से हे फीवर (मौसमी एलर्जी) जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है । खांसी और दमा में भी फिटकरी फायदेमंद हो सकती, लेकिन इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।


5. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से जुड़ी समस्याओं में भी फिटकरी अहम भूमिका निभा सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, फिटकरी मूत्राशय से होने वाले भारी रक्तस्राव को रोकने का काम कर सकती है, जो किसी संक्रमण की वजह से हो सकता है। फिटकरी एक कारगर अस्ट्रिन्जन्ट है, जो रक्तस्राव वाले भाग पर प्रभावी रूप से काम करता है ।


6. जुएं मारने के लिए 
बालों की देखभाल के लिए भी फिटकरी के फायदे बहुत हैं। जुएं, बालों से जुड़ी एक आम समस्या है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। जुएं ज्यादातर बच्चों के बालों को निशाना बनाती हैं और एक प्रभावित इंसान के बालों से दूसरे इंसान के बालों में आसानी से जा सकती हैं। इनसे सिर में खुजली और स्कैल्प संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जुओं से निजात पाने के लिए आप फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिटकरी का पेस्ट आसानी से जुओं से छुटकारा दिला सकता है ।


7. कटने और घाव भरने के लिए
कटने और घाव की स्थिति को ठीक करने के लिए भी फिटकरी के फायदे बहुत हैं। यह अस्ट्रिन्जन्ट और हेमोस्टेटिक गुणों से समृद्ध होती है, जो शरीर के घाव, कटने और मुंह के छालों को जल्द भरने का काम करती है।


8. मुंहासों के लिए
अगर आप मुंहासों से परेशान हैं, तो फिटकरी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। फिटकरी अस्ट्रिन्जन्ट गुणों से समृद्ध होती है और एक रिपोर्ट के अनुसार अस्ट्रिन्जन्ट मुंहासों को ठीक करने का काम कर सकता है । मुंहासों से राहत पाने के लिए आप फिटकरी का पेस्ट प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।


9. झुर्रियां और एंटी एजिंग 
फिटकरी का इस्तेमाल बहुत से सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसमें अस्ट्रिन्जन्ट गुण होते हैं, जो त्वचा में कसाव (tightens) लाने का काम करते हैं । झुर्रियों और एजिंग के प्रभाव को कम करने के लिए आप फिटकरी को प्रयोग में ला सकते हैं।


10. रंग होता है साफ
जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि फिटकरी अस्ट्रिन्जन्ट गुणों से समृद्ध होती है और अस्ट्रिन्जन्ट त्वचा से गंदगी निकालने के साथ-साथ त्वचा को टोन करने का काम करता है। इससे त्वचा का रंग निखरने में मदद मिलती है ।

शरीर को होने वाले फिटकरी के फायदे जानने के बाद नीचे जानिए शरीर के लिए इसका उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।

फिटकरी का उपयोग – 

  • खांसी और अस्थमा के लिए : आप 10 ग्राम फिटकरी और 10 ग्राम चीनी को पीस कर चूर्ण बना लें और 14 भागों में अलग कर दें। अब रोज रात को सोने से पहले एक कप गर्म दूध के साथ इस चूर्ण के एक भाग का सेवन करें। खांसी और दमा के लिए फिटकरी फायदेमंद हो सकती, लेकिन इस पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।
  • दांतों और मुंह के लिए : दांतों से प्लाक और कैविटी हटाने के लिए आप फिटकरी को माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप एक गिलास पानी गर्म कर लें और उसमें चुटकी भर नमक और एक छोटा चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाकर छान लें। ठंडा होने पर आप इस पानी को इस्तेमाल में ला सकते हैं।
  • जुंओं के लिए : जुओं के लिए फिटकिरी का उपयोग करने के लिए फिटकरी का पाउडर लें और इसे पानी में मिलाएं। इस मिश्रण में थोड़ा टी ट्री ऑयल भी मिलाएं। अब इस मिश्रण को अपने स्कैल्प पर लगाएं और 10 मिनट तक मसाज करें, इसके बाद ठंडे पानी से बालों को धो लें। इसके बाद अपने बालों को शैम्पू और कंडीशन करना न भूलें।
  • ऐंठन के लिए : इसके लिए आप समान मात्रा में हल्दी और फिटकरी पाउडर लें और पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाएं। ध्यान रहे पेस्ट मले नहीं, बल्कि लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें और बाद में हल्के गुनगुने पानी से त्वचा को धो लें। दिन में दो-तीन बार कुछ दिन यह उपाय करके दर्द से राहत मिल जाएगी।
  • चोट या घाव के लिए : एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाएं और गुनगुना होने के लिए रख दें। अब इस पानी से चोट या घाव को दिन में दो से तीन बार धोएं।
  • शेव करने के बाद : शेव करने के बाद आप चेहरे पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कर सीधा फिटकरी को रगड़ सकते हैं। ऐसा करने से सेप्टिक होने की आशंका कम हो जाती है।
  • झुर्रियों और एंटीएजिंग के लिए : चेहरे पर साफ पानी छिड़कें और फिटकरी के टुकड़े को सीधा पूरे चेहरे (आंखों और होंठों को छोड़कर) पर धीरे-धीरे रगड़ें।
  • फिटकरी के फायदे, प्रकार और उपयोग के बाद चलिए अब जान लेते हैं इससे होने वाले कुछ नुकसानों के बारे में।
फिटकरी के नुकसान –
  • इसमें कोई शक नहीं है कि फिटकरी गुणकारी पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल आप शरीर से जुड़ी कई परेशानियों के लिए कर सकते हैं, लेकिन फिटकरी के फायदों के साथ इसके दुष्प्रभावों को नकारा नहीं जा सकता है। नीचे जानिए फिटकरी से होने वाले कुछ नुकसान ।
  • फिटकरी को सूंघने से नाक-गले में जलन, फेफड़ों को प्रभावित करने वाली खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • फिटकरी को त्वचा पर लगाने से स्किन और आंखों में जलन व रैशेज भी हो सकते हैं।
  • पानी में मिलाई गई फिटकरी के संपर्क में आने से आंखें बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

Jun 18, 2025

कब्ज का जड़ से इलाज: जानिए कारण, लक्षण और घरेलू उपाय | Constipation Treatment in Hindi | Kabj Ka Gharelu Ilaj

 कब्ज का जड़ से इलाज: जानिए कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

Constipation Treatment in Hindi | Kabj Ka Gharelu Ilaj

कब्ज (Constipation) एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो आज की जीवनशैली, गलत खान-पान और तनाव के कारण बहुत लोगों को प्रभावित कर रही है। अगर समय रहते इसे ठीक न किया जाए तो यह पेट, लीवर और पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है।

इस लेख में हम जानेंगे कब्ज के प्रमुख कारण, लक्षण, और घरेलू इलाज जो बिना दवाइयों के इस समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं।

Apr 30, 2025

पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत

Health News Center: पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत:


मासिक धर्म (Periods) एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन इससे जुड़ी तकलीफें कई महिलाओं के लिए तनाव का कारण बन जाती हैं। पेट दर्द, पीठ में खिंचाव, चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

1. गर्म पानी का सेवन करें

जैसे ही दर्द शुरू हो, 2-3 ग्लास गर्म पानी पी लें। यह पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और ब्लड फ्लो बेहतर करता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है।

Mar 22, 2025

जीरे का पानी दोगुना तेजी से कम करता है वजन, जानें कैसे Cumin water reduces weight twice as fast, know how

 खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला जीरा सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने के लिए जीरे का पानी एक बेहतरीन ऑप्शन है. जी हां, सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाने वाला जीरा वजन को कम करने में भी मददगार साबित होता है.

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह खाली पेट जीरे का पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है. अगर आप भी बेली फैट से परेशान हैं और चाहते हैं कि बिना कुछ ज्यादा प्रयास के ये कम हो जाए तो जीरे का इस्तेमाल आपके लिए काफी कारगर साबित हो सकता है.