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Jan 26, 2026

फिटकरी के फायदे, उपयोग और नुकसान



फिटकरी एक रंगहीन रसायनिक पदार्थ है, जो एक किस्टल की तरह होती है। इसका रासायनिक नाम पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट है। इसे अंग्रेजी में एलम कहा जाता है। सामान्य से दिखने वाले इस पदार्थ का महत्व चिकित्सा के क्षेत्र में अहम है। आगे हम बता रहे हैं कि फिटकरी के कौन-कौन से प्रकार उपलब्ध हैं।
फिटकरी के प्रकार – 
फिटकरी का सही चुनाव करना आपके लिए बड़ा सवाल हो सकता है। सही चुनाव करने के लिए आपको इसके विभिन्न रूपों के बारे में पता होना चाहिए। आइए, नीचे जानते हैं फिटकरी के विभिन्न प्रकारों के बारे में।
पोटैशियम एलम : पोटैशियम एलम को पोटाश एलम और पोटैशियम एलम सल्फेट के नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। माना जाता है कि 1500 ईसा पूर्व के आसपास फिटकरी के इस रूप का इस्तेमाल पानी की गंदगी को साफ करने के लिए किया गया था।
अमोनियम एलम : अमोनियम एलम एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है। फिटकरी के इस प्रकार का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल संबंधी उत्पादों में किया जाता है, जैसे आफ्टरशेव लोशन और हाथों से जुड़े उत्पाद।


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क्रोम एलम : क्रोम एलम भी फिटकरी का एक प्रकार है, जिसे क्रोमियम पोटैशियम सल्फेट के नाम से भी जाना जाता है। यह क्रोमियम (एक रासायनिक तत्व) का पोटैशियम डबल सल्फेट है, जिसका इस्तेमाल चमड़ा बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है।
एल्‍यूमीनियम सल्‍फेट : इस कम्पाउन्ड को पेपरमेकर की फिटकरी के रूप में भी जाना जाता है। वैसे, तकनीकी रूप से यह फिटकिरी नहीं है।


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सोडियम एलम : यह एक अकार्बनिक (Inorganic) कंपाउंड है, जिसे सोडा एलम के नाम से भी जाना जाता है। इस सफेद ठोस का उपयोग बेकिंग पाउडर के निर्माण और फूड एडिटिव के रूप में किया जाता है।
सेलेनेट एलम : फिटकरी का वो प्रकार, जिसमें सल्फर की जगह सेलेनियम मौजूद होता है।
फिटकरी के फायदे – 

1. दंत स्वास्थ्य
फिटकरी के फायदे दांतों के लिए बहुत हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर फिटकरी से मुंह की सफाई की जाए, तो दांत की कैविटी और दांतों के टूटने की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसके लिए आप फिटकरी को माउथवॉश के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं ।


2. शरीर की दुर्गंध 
अगर आप शरीर की दुर्गंध से परेशान हैं, तो आप फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पैरों की बदबू दूर करने के लिए फिटकरी का प्रयोग किया जा सकता है (2)। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, त्वचा की दुर्गंध हटाने के लिए फिटकरी का इस्तेमाल आफ्टरशेव, डिओडरेंट और बॉडी लोशन में भी किया जाता है ।


3. माउथवॉश
फिटकरी एक कारगर माउथवॉश भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार फिटकरी युक्त माउथवॉश का दैनिक उपयोग करने से प्लाक से छुटकारा पाया जा सकता है। खासकर, बच्चों के ओरल हेल्थ में फिटकरी अहम भूमिका निभा सकती है ।


4. मांसपेशियों की ऐंठन 
फिटकरी के फायदे यहीं खत्म नहीं होते हैं। आप इसका इस्तेमाल मांसपेशियों की ऐंठन से राहत पाने के लिए भी कर सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, पोटैशियम एलम (फिटकरी) से मांसपेशियों में संकुचन (contraction) को दूर किया जा सकता है ।
बुखार और खांसी जैसी शारीरिक समस्याओं के लिए भी फिटकरी के बहुत फायदे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, फिटकरी के इस्तेमाल से हे फीवर (मौसमी एलर्जी) जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है । खांसी और दमा में भी फिटकरी फायदेमंद हो सकती, लेकिन इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।


5. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से जुड़ी समस्याओं में भी फिटकरी अहम भूमिका निभा सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, फिटकरी मूत्राशय से होने वाले भारी रक्तस्राव को रोकने का काम कर सकती है, जो किसी संक्रमण की वजह से हो सकता है। फिटकरी एक कारगर अस्ट्रिन्जन्ट है, जो रक्तस्राव वाले भाग पर प्रभावी रूप से काम करता है ।


6. जुएं मारने के लिए 
बालों की देखभाल के लिए भी फिटकरी के फायदे बहुत हैं। जुएं, बालों से जुड़ी एक आम समस्या है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। जुएं ज्यादातर बच्चों के बालों को निशाना बनाती हैं और एक प्रभावित इंसान के बालों से दूसरे इंसान के बालों में आसानी से जा सकती हैं। इनसे सिर में खुजली और स्कैल्प संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जुओं से निजात पाने के लिए आप फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिटकरी का पेस्ट आसानी से जुओं से छुटकारा दिला सकता है ।


7. कटने और घाव भरने के लिए
कटने और घाव की स्थिति को ठीक करने के लिए भी फिटकरी के फायदे बहुत हैं। यह अस्ट्रिन्जन्ट और हेमोस्टेटिक गुणों से समृद्ध होती है, जो शरीर के घाव, कटने और मुंह के छालों को जल्द भरने का काम करती है।


8. मुंहासों के लिए
अगर आप मुंहासों से परेशान हैं, तो फिटकरी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। फिटकरी अस्ट्रिन्जन्ट गुणों से समृद्ध होती है और एक रिपोर्ट के अनुसार अस्ट्रिन्जन्ट मुंहासों को ठीक करने का काम कर सकता है । मुंहासों से राहत पाने के लिए आप फिटकरी का पेस्ट प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।


9. झुर्रियां और एंटी एजिंग 
फिटकरी का इस्तेमाल बहुत से सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसमें अस्ट्रिन्जन्ट गुण होते हैं, जो त्वचा में कसाव (tightens) लाने का काम करते हैं । झुर्रियों और एजिंग के प्रभाव को कम करने के लिए आप फिटकरी को प्रयोग में ला सकते हैं।


10. रंग होता है साफ
जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि फिटकरी अस्ट्रिन्जन्ट गुणों से समृद्ध होती है और अस्ट्रिन्जन्ट त्वचा से गंदगी निकालने के साथ-साथ त्वचा को टोन करने का काम करता है। इससे त्वचा का रंग निखरने में मदद मिलती है ।

शरीर को होने वाले फिटकरी के फायदे जानने के बाद नीचे जानिए शरीर के लिए इसका उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।

फिटकरी का उपयोग – 

  • खांसी और अस्थमा के लिए : आप 10 ग्राम फिटकरी और 10 ग्राम चीनी को पीस कर चूर्ण बना लें और 14 भागों में अलग कर दें। अब रोज रात को सोने से पहले एक कप गर्म दूध के साथ इस चूर्ण के एक भाग का सेवन करें। खांसी और दमा के लिए फिटकरी फायदेमंद हो सकती, लेकिन इस पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।
  • दांतों और मुंह के लिए : दांतों से प्लाक और कैविटी हटाने के लिए आप फिटकरी को माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप एक गिलास पानी गर्म कर लें और उसमें चुटकी भर नमक और एक छोटा चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाकर छान लें। ठंडा होने पर आप इस पानी को इस्तेमाल में ला सकते हैं।
  • जुंओं के लिए : जुओं के लिए फिटकिरी का उपयोग करने के लिए फिटकरी का पाउडर लें और इसे पानी में मिलाएं। इस मिश्रण में थोड़ा टी ट्री ऑयल भी मिलाएं। अब इस मिश्रण को अपने स्कैल्प पर लगाएं और 10 मिनट तक मसाज करें, इसके बाद ठंडे पानी से बालों को धो लें। इसके बाद अपने बालों को शैम्पू और कंडीशन करना न भूलें।
  • ऐंठन के लिए : इसके लिए आप समान मात्रा में हल्दी और फिटकरी पाउडर लें और पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाएं। ध्यान रहे पेस्ट मले नहीं, बल्कि लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें और बाद में हल्के गुनगुने पानी से त्वचा को धो लें। दिन में दो-तीन बार कुछ दिन यह उपाय करके दर्द से राहत मिल जाएगी।
  • चोट या घाव के लिए : एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाएं और गुनगुना होने के लिए रख दें। अब इस पानी से चोट या घाव को दिन में दो से तीन बार धोएं।
  • शेव करने के बाद : शेव करने के बाद आप चेहरे पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कर सीधा फिटकरी को रगड़ सकते हैं। ऐसा करने से सेप्टिक होने की आशंका कम हो जाती है।
  • झुर्रियों और एंटीएजिंग के लिए : चेहरे पर साफ पानी छिड़कें और फिटकरी के टुकड़े को सीधा पूरे चेहरे (आंखों और होंठों को छोड़कर) पर धीरे-धीरे रगड़ें।
  • फिटकरी के फायदे, प्रकार और उपयोग के बाद चलिए अब जान लेते हैं इससे होने वाले कुछ नुकसानों के बारे में।
फिटकरी के नुकसान –
  • इसमें कोई शक नहीं है कि फिटकरी गुणकारी पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल आप शरीर से जुड़ी कई परेशानियों के लिए कर सकते हैं, लेकिन फिटकरी के फायदों के साथ इसके दुष्प्रभावों को नकारा नहीं जा सकता है। नीचे जानिए फिटकरी से होने वाले कुछ नुकसान ।
  • फिटकरी को सूंघने से नाक-गले में जलन, फेफड़ों को प्रभावित करने वाली खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • फिटकरी को त्वचा पर लगाने से स्किन और आंखों में जलन व रैशेज भी हो सकते हैं।
  • पानी में मिलाई गई फिटकरी के संपर्क में आने से आंखें बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

Jun 18, 2025

कब्ज का जड़ से इलाज: जानिए कारण, लक्षण और घरेलू उपाय | Constipation Treatment in Hindi | Kabj Ka Gharelu Ilaj

 कब्ज का जड़ से इलाज: जानिए कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

Constipation Treatment in Hindi | Kabj Ka Gharelu Ilaj

कब्ज (Constipation) एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो आज की जीवनशैली, गलत खान-पान और तनाव के कारण बहुत लोगों को प्रभावित कर रही है। अगर समय रहते इसे ठीक न किया जाए तो यह पेट, लीवर और पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है।

इस लेख में हम जानेंगे कब्ज के प्रमुख कारण, लक्षण, और घरेलू इलाज जो बिना दवाइयों के इस समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं।

Apr 30, 2025

पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत

Health News Center: पीरियड्स की तकलीफें: आसान घरेलू नुस्खे जो दिलाएं राहत:


मासिक धर्म (Periods) एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन इससे जुड़ी तकलीफें कई महिलाओं के लिए तनाव का कारण बन जाती हैं। पेट दर्द, पीठ में खिंचाव, चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

1. गर्म पानी का सेवन करें

जैसे ही दर्द शुरू हो, 2-3 ग्लास गर्म पानी पी लें। यह पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और ब्लड फ्लो बेहतर करता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है।

Mar 22, 2025

जीरे का पानी दोगुना तेजी से कम करता है वजन, जानें कैसे Cumin water reduces weight twice as fast, know how

 खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला जीरा सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने के लिए जीरे का पानी एक बेहतरीन ऑप्शन है. जी हां, सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाने वाला जीरा वजन को कम करने में भी मददगार साबित होता है.

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह खाली पेट जीरे का पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है. अगर आप भी बेली फैट से परेशान हैं और चाहते हैं कि बिना कुछ ज्यादा प्रयास के ये कम हो जाए तो जीरे का इस्तेमाल आपके लिए काफी कारगर साबित हो सकता है.

Mar 1, 2025

कालीमिर्च (मरिच) के फायदे, उपयोग, नुकसान और आयुर्वेदिक गुण | Black Pepper in Hindi

कालीमिर्च भारतीय रसोई में प्रयुक्त होने वाला एक सामान्य मसाला है, परंतु आयुर्वेद में इसका स्थान एक शक्तिशाली औषधि के रूप में माना गया है। इसे “मसालों का राजा” कहा जाता है। कालीमिर्च शरीर की जठराग्नि को प्रबल करती है, कफ दोष को नष्ट करती है और पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाती है। प्राचीन काल से इसका प्रयोग घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है और आज भी यह आयुर्वेदिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है।

संस्कृत में कालीमिर्च को मरिच, कृष्णा, उष्ण और वल्लिजा कहा जाता है। हिंदी में इसे कालीमिर्च या गोल मिर्च कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसका नाम Black Pepper है। भारत की विभिन्न भाषाओं में इसे तमिल में मिलागु, मलयालम में कुरुमुलकु और बंगाली में गोलमोरिच कहा जाता है।

कालीमिर्च का मूल स्थान भारत का पश्चिमी घाट क्षेत्र माना जाता है। वर्तमान समय में यह मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में उगाई जाती है। विश्व स्तर पर वियतनाम, इंडोनेशिया और ब्राज़ील इसके प्रमुख उत्पादक देश हैं। कालीमिर्च बेलदार पौधे के फल से प्राप्त होती है, जिसे पकने से पहले तोड़कर सुखाया जाता है।

कालीमिर्च के रासायनिक  गुण

कालीमिर्च के औषधीय प्रभाव इसके अंदर पाए जाने वाले सक्रिय रासायनिक तत्वों के कारण होते हैं। ये तत्व पाचन, प्रतिरक्षा, सूजन-नियंत्रण और रोगाणुनाशक क्रिया में योगदान देते हैं।

1. पाइपरिन (Piperine)

पाइपरिन कालीमिर्च का मुख्य सक्रिय घटक है, जो इसे तीखा स्वाद देता है। यह पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है, पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है और अन्य औषधियों की जैव-उपलब्धता (bioavailability) बढ़ाने में सहायक माना जाता है। यही तत्व कफ को पतला करने और शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

2. वाष्पशील तेल (Volatile Oils)

कालीमिर्च में सुगंधित वाष्पशील तेल पाए जाते हैं, जो जीवाणुनाशक और एंटीसेप्टिक गुणों से युक्त होते हैं। ये तेल श्वसन तंत्र को साफ रखने, गले के संक्रमण को कम करने और सर्दी-जुकाम में राहत देने में सहायक होते हैं।

3. एल्कलॉइड्स (Alkaloids)

पाइपरिन के अतिरिक्त अन्य अल्कलॉइड्स भी अल्प मात्रा में उपस्थित रहते हैं। ये तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने, मानसिक सतर्कता बढ़ाने और थकान को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

4. रेज़िन (Resins)

कालीमिर्च में पाए जाने वाले रेज़िन सूजन-रोधी (anti-inflammatory) गुणों से युक्त होते हैं। ये त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द और आंतरिक सूजन को कम करने में योगदान करते हैं।

5. फ्लैवोनॉयड्स (Flavonoids)

फ्लैवोनॉयड्स शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करते हैं, कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और दीर्घकालिक रोगों के जोखिम को घटाने में सहायक माने जाते हैं।

6. टैनिन (Tannins)

टैनिन कसैले (astringent) गुणों वाले तत्व हैं। ये दस्त और पेचिश में आंतों को संकुचित कर लाभ पहुंचाते हैं तथा मुंह और मसूड़ों के स्वास्थ्य में भी सहायक होते हैं।

7. आवश्यक खनिज तत्व (Minerals)

कालीमिर्च में कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और मैंगनीज़ जैसे खनिज अल्प मात्रा में पाए जाते हैं। ये हड्डियों, रक्त निर्माण और तंत्रिका क्रिया को सहारा देते हैं।

8. विटामिन तत्व

इसमें विटामिन A, विटामिन C और विटामिन B-समूह (विशेषकर B6) की अल्प मात्रा पाई जाती है, जो प्रतिरक्षा और चयापचय क्रियाओं में सहायक होती है।

9. फाइबर (Dietary Fiber)

कालीमिर्च में प्राकृतिक फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र की गति को संतुलित रखने और कब्ज की प्रवृत्ति को कम करने में सहायक होता है।

10. एंटीऑक्सीडेंट यौगिक (Antioxidant Compounds)

कालीमिर्च में कई प्रकार के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को क्षति से बचाने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माने जाते हैं।

कालीमिर्च के रासायनिक तत्व—विशेषकर पाइपरिन, वाष्पशील तेल और फ्लैवोनॉयड्स—ही इसके औषधीय गुणों का आधार हैं। ये तत्व पाचन, प्रतिरक्षा, सूजन नियंत्रण और संक्रमण से रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण कालीमिर्च को केवल मसाला नहीं, बल्कि एक प्रभावी प्राकृतिक औषधीय द्रव्य माना जाता है

आयुर्वेदिक गुण-धर्म

आयुर्वेद के अनुसार कालीमिर्च का रस कटु (तीखा) होता है। इसके गुण लघु, रूक्ष और तीक्ष्ण माने गए हैं। इसका वीर्य उष्ण तथा विपाक भी कटु होता है। यह विशेष रूप से कफ दोष का नाश करती है, वात को संतुलित करती है, लेकिन अधिक मात्रा में लेने पर पित्त दोष को बढ़ा सकती है।

कालीमिर्च का शरीर पर समग्र प्रभाव

कालीमिर्च शरीर की निष्क्रियता को दूर करती है। यह रक्त संचार को तेज करती है, पसीना लाकर विषैले तत्वों को बाहर निकालती है और शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करती है। इसी कारण सर्दी, जुकाम, कफ और ठंड से संबंधित रोगों में इसका विशेष महत्व है।

1. पाचन शक्ति बढ़ाने वाला गुण

कालीमिर्च जठराग्नि को प्रबल करती है और भोजन को सही ढंग से पचाने में सहायता करती है। अपच, गैस, भारीपन और पेट फूलने जैसी समस्याओं में यह विशेष रूप से लाभकारी है।
उपयोग की विधि:
कालीमिर्च, सोंठ, जीरा और सेंधा नमक समान मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाएं। भोजन के बाद आधा से एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें।

2. सर्दी, जुकाम और बुखार में लाभ

कालीमिर्च शरीर में जमी कफ को पिघलाकर बाहर निकालती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करती है और हल्के बुखार में पसीना लाकर राहत देती है।
उपयोग की विधि:
5–6 साबुत कालीमिर्च, तुलसी के पत्ते, अदरक, लौंग और इलायची को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और दिन में 2–3 बार पिएँ।

3. खांसी और गले के रोग

कालीमिर्च श्लेष्मा (बलगम) को कम करती है और श्वसन मार्ग को साफ करती है।
उपयोग की विधि:
आधा चम्मच कालीमिर्च पाउडर शहद में मिलाकर दिन में 2–3 बार चाटें या काढ़े से गरारे करें।

4. गैस और अम्लता

कालीमिर्च आंतों में जमी गैस को बाहर निकालने में सहायक होती है।
उपयोग की विधि:
एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू रस, काला नमक और चुटकी भर कालीमिर्च मिलाकर सेवन करें।

5. भूख न लगना

कालीमिर्च भूख बढ़ाने वाली औषधि मानी जाती है।
उपयोग की विधि:
भोजन से पहले थोड़ी कालीमिर्च पाउडर मिश्री के साथ लें।

6. आवाज और स्वर की शुद्धता

कालीमिर्च गले की सूजन कम कर आवाज को स्पष्ट बनाती है।
उपयोग की विधि:
घी और मिश्री के साथ कालीमिर्च पाउडर सुबह चाटें।

7. त्वचा रोगों में उपयोग

कालीमिर्च में जीवाणुनाशक गुण होते हैं, जो त्वचा रोगों में सहायक हैं।
उपयोग की विधि:
कालीमिर्च को घी में पीसकर दाद, खाज या फोड़े पर लेप करें।

8. दांत और मसूड़े

कालीमिर्च मुख की दुर्गंध दूर करती है और मसूड़ों को मजबूत बनाती है।
उपयोग की विधि:
कालीमिर्च उबालकर उसके पानी से गरारे करें।

9. मस्तिष्क और स्मरण शक्ति

कालीमिर्च मस्तिष्क में रक्त संचार को बेहतर बनाती है।
उपयोग की विधि:
ब्राह्मी, घी और थोड़ी कालीमिर्च मिलाकर सेवन करें।

10. आंखों की कमजोरी

सीमित मात्रा में कालीमिर्च आंखों की कार्यक्षमता को सहारा देती है।
उपयोग की विधि:
घी और मिश्री के साथ चुटकी भर कालीमिर्च सुबह लें।

11. बदहजमी और पेट दर्द

कालीमिर्च वातजन्य पेट दर्द में लाभकारी है।
उपयोग की विधि:
अदरक और नींबू रस में कालीमिर्च मिलाकर सेवन करें।

12. पेचिश और दस्त

कालीमिर्च आंतों को संकुचित कर दस्त को नियंत्रित करती है।
उपयोग की विधि:
शहद के साथ कालीमिर्च चाटें और ऊपर से छाछ पिएँ।

13. नकसीर और चक्कर

कालीमिर्च रक्तस्राव और चक्कर में सहायक मानी जाती है।
उपयोग की विधि:
दही और पुराने गुड़ के साथ कालीमिर्च सेवन करें।

14. रोग प्रतिरोधक क्षमता

कालीमिर्च शरीर की प्राकृतिक इम्युनिटी को मजबूत करती है।
उपयोग की विधि:
सूप, दूध या काढ़े में थोड़ी मात्रा में मिलाकर सेवन करें।

कालीमिर्च के संभावित नुकसान

अधिक मात्रा में कालीमिर्च का सेवन करने से पेट में जलन, एसिडिटी, मुंह में छाले, पित्त विकार और रक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। अत्यधिक उष्ण प्रकृति होने के कारण यह सभी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होती।

मात्रा और सावधानी

कालीमिर्च चूर्ण की सामान्य सुरक्षित मात्रा 250 मिलीग्राम से 1 ग्राम प्रतिदिन मानी जाती है। गर्भवती महिलाएँ, अल्सर के रोगी और अधिक पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति सेवन से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

कालीमिर्च केवल स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि एक संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय द्रव्य है। सही मात्रा, सही विधि और सही परिस्थिति में इसका उपयोग अनेक शारीरिक विकारों में सहायक सिद्ध होता है। यह जानकारी परंपरागत आयुर्वेदिक अनुभवों पर आधारित, मौलिक और कॉपीराइट-मुक्त है, जिसे शैक्षणिक, ब्लॉग, पुस्तक या जन-जागरूकता के उद्देश्य से निःसंकोच उपयोग किया जा सकता है।

Feb 13, 2025

आँखों के लिए एक्यूप्रेशर पॉइंट्स (Acupressure Points for Eyes)

दिनभर कंप्यूटर के सामने कार्य करना और घर पर टीवी के सामने समय बिताना, आंखों में थकान, सिर में भारीपन और दृष्टि में कमी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। यह समस्याएं आजकल के डिजिटल युग में आम हो गई हैं, जहां लोग लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहते हैं। ऐसे में आंखों के चारों ओर कुछ विशेष बिंदुओं पर एक्यूप्रेशर मसाज करने से आप इन समस्याओं से राहत पा सकते हैं। एक्यूप्रेशर एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव डालकर स्वास्थ्य में सुधार करने का कार्य करती है।

 पहला बिंदु:
नाक के दोनों ओर स्थित हड्डियों को छूकर देखें। ये बिंदु आपके चेहरे के मध्य में होते हैं। इन बिंदुओं पर उंगली से दबाव डालें। 30 सेकंड तक तेज दबाव बनाए रखें और फिर छोड़ दें। यह प्रक्रिया न केवल तनाव को कम करती है, बल्कि रक्त संचार को भी बेहतर बनाती है, जिससे आंखों की थकान में कमी आती है।

Feb 1, 2025

कमर दर्द (Back Pain) : लक्षण, कारण और उपचार

 



कमर दर्द : लक्षण, कारण और  उपचार

कमर दर्द (पीठ दर्द) (Back Pain) किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, जो कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाता है।

इसी कारण, ज्यादातर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए कमर दर्द परेशानी बन जाती है और उन्हें इसकी वजह से काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में जब किसी व्यक्ति को कमर दर्द हो, तो उसे शुरूआत में ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि यह अधिक न बढ़े।

कमर दर्द क्या है? (What is back pain)

कमर दर्द को पीठ दर्द के नाम से भी जाना जाता है। जब किसी व्यक्ति के पीट के ऊपरी, मध्यम या निचले हिस्से में खिंचाव महसूस होता है, तो उसे कमर दर्द या पीठ दर्द कहा जाता है।